Qurbani Ki Dua | कुर्बनी की दुआ हिन्दी, इंग्लिश और अरबी मे

अस्सलमु आलेकुम नाज़रीन, आज हम आपकी खिदमत मे हाजिर है एक बहुत ही अहम और खास दुआ को लेकर जो की Qurbani Ki Dua है।

दोस्तों जैसे हम सभी जानते है, मुसलमान ईद उल अज़हा के दिन अपने जानवर की कुर्बानी देते है इसमे बकरा, भैस, ऊठ और भेड़ आदि की कुर्बानी दी जाती है लेकिन इन सब जानवरों को कुर्बानी देने से पहले इस दुआ को ही पढ़ा जाता है।

Qurbani Ki Dua

दोस्तों कुर्बानी देने इस्लाम मे वाजिब है अल्लाह के नबी इब्राहीम आले हिस सलाम की सुन्नत है इसलिए अल्लाह ने मुसलमान के ऊपर कुर्बानी वाजिब की है। कुर्बानी की इस दुआ को जानवर को ज़िबह करने से पहले पढ़ी जाती है।

कुर्बनी इस्लाम मे मुसलमानों पर किनते अहम इस हदीस से आप अंदाजा लगाया जा सकता है।

जाबिर बिन अब्दुल्लाह रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सललल्लाहु अलैही वसल्लम ने ईद के दिन दो भेड़ों की क़ुर्बानी की, जब आप सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम नेउनको क़िब्ला रुख़ किया तो ये कलिमात ईरशाद फरमाये” ईन्नी वज्जहतू वजहीया लिललज़ी फातारस समावाती वल अरदा हनीफव वमा अना मीनल मुशरीकिन, इन्ना सलाती वा नुसुकी वा महयाया वा मामाती लिल्लाही रबबील आलमीन,ला शरीका लहू वा बिज़ालिका उमीरतू वा अना अव्वलू मीनल मुसलीमीन,अल्लहुम्मा मिनका वा लका अन मुहम्मदिव व उम्मातिही ( बिस्मिल्लही वा अल्लाहू अकबर )(मुहम्मदिव व उम्मातिही की जगह जिसकी तरफ से क़ुरबानी हो उसका नाम ले और अपनी तरफ से हो तो वा लका अन्नी कहे )

क़ुरबानी की मुकम्मकल दुआ सीखे

Qurbani Ki Dua in Hindi

“इन्नी वज्जहतु वजहि य लिल्लज़ी फ़ त रस्मावाति वल अर्दा हनीफँव व् माअन मिनल मुशरिकीन इन न सलाती व नुसुकी मह्या य व ममाती लिल्लाहि रब्बिल आलमीन ला शरी क लहू व बि ज़ालि क उमिरतु व अन मिनल मुस्लिमीन अल्लाहुम्मा लक व मिन क बिस्मिल्लाहि अल्लाहु अकबर।“

Qurbani Ki Dua in English

Inni wahhahtu wajhia lillazi fataras samawaati wl arz haneefa w ma ana minal mushrikeen inna salati w nusuki w mahyaya w mamati lillahi rabbil aalmeen la sharika lahu w bizalika umirtu w ana awwalul muslimeen allahumma la k wa min k bis millahi allahu akbar

कुर्बानी की दुआ का तर्जुमा।

मैंने उस जात की तरफ अपना रुख मोड़ा जिसने आसमानों को और जमीनों को पैदा किया. इस हाल में मै इब्राहीम में हनीफ के दीन पर हूं और मुनिको में से नहीं हूँ। बेशक मेरी नमाज़ और मेरी इबादत और मेरा मरना और जीना सब अल्लाह के लिए है जो रब्बुल आलमीन है. जिसका कोई शरीक नहीं और मुझे इसी का हुक्म दिया गया है और मैं फरमाबरदारों में से हूं। ऐ अल्लाह, यह कुर्बानी तेरी तौफीक से है और तेरे लिए है।

आज अपने क्या सीख?

दोस्तों इस्लाम मे कुर्बानी वाजिब है इसलिए जो मुसलमान माली हेसियात रखता हो उसे चाहिए कुर्बानी करे और Qurbani Ki Dua भी पढे।

मैं उम्मीद करता हु आपको ये लेख काफी पसंद आया होगा ऐसे ही इस्लामिक दुआओ के लिए आप हमारी इस वेबसाईट को चेक कर सकते है और किसी भी काम को शुरू करने से पहले आप उस काम को आसान और सुन्नती बना सकते है।

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Bilal Ahmad

इस्लामकादुआ.कॉम एक इस्लामिक वेबसाइट है जो बिलाल अहमद द्वारा 2023 में शुरू की गई है, ताकि दुनिया भर के लोगो तक ऑथेंटिक इस्लामिक दुआएं, और जानकारी हदीस की रौशनी में पहुंचाई जा सके।

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